देश के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा प्रोजेक्ट्स में शामिल स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk1A की डिलीवरी में लगातार हो रही देरी को लेकर रक्षा मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया है। भारतीय वायुसेना (IAF) को तय समय पर विमान नहीं मिलने के कारण सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पर अनुबंध के तहत आर्थिक दंड लगाने की संभावना जताई जा रही है। मंत्रालय ने HAL से देरी के कारणों और नई डिलीवरी योजना का विस्तृत विवरण मांगा है।
तेजस Mk1A, हल्के लड़ाकू विमान (LCA) तेजस का उन्नत संस्करण है, जिसमें आधुनिक AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, बेहतर एवियोनिक्स और उन्नत हथियार प्रणाली जैसी सुविधाएं शामिल हैं। यह विमान भारतीय वायुसेना की युद्ध क्षमता बढ़ाने और पुराने लड़ाकू विमानों की जगह लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है।
डिलीवरी में देरी की मुख्य वजह अमेरिकी कंपनी GE Aerospace से F404 इंजन की आपूर्ति में हुई देरी बताई जा रही है। इसके अलावा तकनीकी परीक्षण, सिस्टम इंटीग्रेशन, सॉफ्टवेयर अपग्रेड और आवश्यक प्रमाणन प्रक्रियाओं में अपेक्षा से अधिक समय लगने के कारण भी परियोजना प्रभावित हुई है।
भारतीय वायुसेना पहले से ही स्क्वाड्रन की कमी की चुनौती का सामना कर रही है। ऐसे में तेजस Mk1A की समय पर आपूर्ति बेहद जरूरी मानी जा रही है। रक्षा मंत्रालय ने HAL को उत्पादन प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं और अनुबंध की शर्तों के अनुसार जुर्माना लगाने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।
हालांकि सरकार का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि परियोजना को गति देना और वायुसेना को जल्द से जल्द विमान उपलब्ध कराना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2026 के अंत तक तेजस Mk1A के कई विमान भारतीय वायुसेना को सौंपे जाने की उम्मीद है। तेजस Mk1A भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसकी समय पर डिलीवरी सरकार, वायुसेना और रक्षा उद्योग की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
Tejas Mk1A Delivery Delay : तेजस की डिलीवरी में देरी पर सरकार नाराज, HAL पर लग सकता है बड़ा जुर्माना...
Source: First Ground